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Massage Girl in Mumbai: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Mumbai who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Mumbai that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Mumbai massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Mumbai who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Mumbai massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Mumbai massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Mumbai who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Mumbai employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Mumbai helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Mumbai

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Mumbai at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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(Hot Sisters Chudai Kahani) चुदाई की कहानी

हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई की कहानी में पढ़ें कि तीन सगी बहनें चुदाई के लिए तड़प रही थी. आखिर वे पढ़ाई के बहाने अपने प्रोफेसर के घर गयी. वहां वे तीन सिस्टर्स कैसे चुदी?

दोस्तो, तीन बहनों की चुदाई की कहानी के पहले भाग
चुदाई की प्यासी तीन सगी बहनें
में मैंने अब तक आपको बताया था कि प्रोफेसर आलोक ने सोनम की चुत को उसकी पैंटी के ऊपर से ही सूंघना शुरू कर दिया था. सोनम भी आलोक के लंड को चाट रही थी.

अब आगे हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई कहानी:

जैसे ही सोनम आलोक का लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगी, आलोक ने सोनम की पैंटी को भी उतार दिया और सोनम को पूरी तरह से नंगी कर दिया.

सोनम नंगी होने से शर्मा रही थी और उसने अपना चेहरा आलोक के सीने में छिपा लिया.
इसी दौरान आलोक ने सोनम की चूचियों को चूसना फिर से चालू कर दिया.
सोनम की चूची अब पत्थर के समान कड़ी हो गई थीं.

तब आलोक ने सोनम को फिर बिस्तर पर चित लिटा दिया और उसकी बुर को अपनी जीभ से चाटने लगा; अपनी जीभ सोनम की बुर के अन्दर बाहर फिराने लगा.

अपनी बुर में आलोक की जीभ घुसते ही सोनम को बहुत मजा आने लगा. वो जोर से आलोक का सिर अपने बुर के ऊपर पकड़ दबाने लगी और थोड़ी देर के बाद अपनी कमर ऊपर नीचे करने लगी.

आलोक चुदाई के मामले में बहुत माहिर खिलाड़ी था, वो सोनम की कसमसाहट से समझ गया कि अब सोनम की बुर में लंड पेलने का समय आ गया है.
उसने सोनम का मुँह चूम कर धीरे से उसके कान पर मुँह रख कर पूछा- सोनम रानी, अपनी कमर क्यों उछाल रही हो? क्या तुम्हारी चूत में कुछ कुछ हो रहा है?

सोनम बोली- हां मेरे डियर सर, कुछ कुछ नहीं … मेरी बुर में चींटियां सी रेंग रही हैं … मेरा सारा बदन तप रहा है, अब तुम ही जल्दी से कुछ करो.
आलोक ने पूछा- क्या तुम अपनी चूत को मेरे लंड से चुदवना चाहती हो?

सोनम ने झुंझला कर कहा- अरे यार, आपने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी कपड़े भी उतार दिए और अब भी पूछ रहे हो कि क्या चुदाई करवानी है … मुझे जल्दी से आपका लंड मेरी चुत में चाहिए.
आलोक ने ये सुना तो उसने सोनम से बोला- ठीक है मेरी जान, अब मैं तुमको चोदूंगा, लेकिन तुमको पहले पहल थोड़ा दर्द होगा, पर मैं तुम्हें बहुत ही प्यार से और धीरे धीरे चोदूंगा … मैं कोशिश करूंगा कि तुमको दर्द महसूस न हो.

अब आलोक उठा और सोनम के दोनों पैर उठा कर घुटनों से मोड़ दिए.
उसने सोनम के दोनों पैरों को अपने हाथों से फैला दिया.

इसके बाद उसने ढेर सारा थूक अपने हाथ में लेकर पहले अपने लंड में लगाया, फिर सोनम की बुर पर लगाया.

थूक से सनी बुर के छेद पर आलोक ने अपने खड़े लंड को रखा और धीरे से कमर को आगे बढ़ा कर अपना सुपारा सोनम की बुर में घुसा दिया और सोनम के ऊपर लेटा रहा.
अनचुदी बुर में लंड घुसा तो सोनम की चुत परपराने लगी.

मगर अभी लंड ने चुत को चीरा नहीं था तो सोनम को ख़ास दर्द नहीं हो रहा था.

थोड़ी देर के बाद जब सोनम नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी तो आलोक ने धीरे धीरे अपना लंड सोनम की बुर में पेलना शुरू किया.

इससे सोनम का बदन दर्द से कांपने लगा और वो चिल्लाने लगी- आह बाहर निकाल लो सर … आह मेरी बुर फटी जा रही है. हाय मैं मर गई … मेरी बुर फटी जा रही है. आप तो कह रहे थे कि थोड़ा सा दर्द होगा और आप आराम आराम से चोदोगे. मुझे नहीं चुदवाना है, आह … आप अपना लंड बाहर निकालो.

आलोक ने सोनम के मुँह में अपना हाथ रख कर कहा- बस मेरी रानी बस, अभी तुम्हारा सारा दर्द खत्म हो जाएगा और तुम्हें मज़ा आने लगेगा. बस थोड़ी सी देर और बर्दाश्त करो.
सोनम - आह उई … मेरी बुर फटी जा रही है … और आप कह रहे हो कि थोड़ी देर और बर्दाश्त करो. अरे मुझे नहीं चुदवानी है अपनी बुर, आप अपना लौड़ा मेरी बुर से बाहर निकालो!

सोनम की आंखों से आंसू आ गए.

इतनी देर में आलोक अपनी कमर उठा कर एक जोरदार धक्का मारा और उसने महसूस किया कि उसका सारा का सारा लंड सोनम की बुर में घुस गया है और सोनम की बुर से खून निकल रहा है.

सोनम दर्द के मारे तड़पने लगी और आलोक को अपने हाथों से अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी.

आलोक सोनम को मज़बूती से पकड़े हुए था और उसका हाथ सोनम के मुँह के ऊपर था इसलिए सोनम कुछ ना कर सकी .. वो बस छटपटा कर रह गयी.

आलोक ने अपना लंड सोनम की बुर के अन्दर ही थोड़ी देर के लिए रहने दिया.
उसने सोनम की एक चूची को अपने मुँह में लेकर जीभ से सहलाना शुरू कर दिया और दूसरी चूची को हाथ से सहलाना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर बाद सोनम की चुत का दर्द गायब हो गया और अब उसे मज़ा आने लगा. उसने नीचे से अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.

आलोक भी धीरे धीरे अपनी कमर हिला हिला कर अपना लौड़ा सोनम की बुर में अन्दर-बाहर करने लगा.

कुछ ही देर में सोनम ने भी अपनी गांड उठा कर जोरदार धक्के देना शुरू कर दिए.

जब आलोक का लंड उसकी बुर में अन्दर घुसा होता तो सोनम उसे कस कर जकड़ लेती और अपनी बुर को सिकोड़ लेती थी.
इससे चुदाई की रगड़ उसे भरपूर मजा दे रही थी.

यह महसूस करके आलोक भी समझ गया कि सोनम को चुदाई का मज़ा आने लगा है.

ये समझते ही आलोक ने अपनी कमर को ऊपर खींच कर अपना पूरा का पूरा लंड सोनम की बुर से बाहर निकाला … उसने सिर्फ लंड का सुपारा ही फांकों में फंसा छोड़ा था.
फिर उसने एक जोरदार झटके के साथ अपना लंड सोनम की बुर में पेल दिया.

इस झटके से सोनम बुरी तरह से कलप उठी और आलोक से लिपट गई.

उसने आलोक को अपने हाथ और पैर से जकड़ लिया था. सारे कमरे में सोनम और आलोक की सिसकारियां और उनकी चुदाई की ‘फच … फच .. फट फट …’ की आवाज ही गूंज रही थी.

सोनम अपने मुँह से सीत्कार रही थी- अह अह … ओह हां और जोर से आह और जोर से … हां ऐसे ही अपना लंड मेरी बुर में पेलते रहो … मजा आ गया सर.

आलोक भी पूरी गति से सोनम की बुर में अपना लंड अन्दर-बाहर करके उसको चोद रहा था.
सोनम बुरी तरह से आलोक से चिपकी हुई थी.

काफी देर तक सोनम की बुर चोद रहे आलोक का लंड अब झड़ने वाला हो गया था.
उसने 8-10 धक्के काफी जोरदार लगाए और उसके लंड से ढेर सारा पानी सोनम की बुर में गिर कर समा गया.

आलोक के झड़ जाने के साथ ही साथ सोनम की बुर ने भी पानी छोड़ दिया.
उसने अपने हाथ पैर से आलोक को जकड़ लिया.

आलोक हांफ़ते हुए सोनम के ऊपर गिर गया और थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.

फिर सोनम उठ कर अपनी बुर में हाथ लगाए हुए बाथरूम की तरफ़ चली गयी.

आलोक इस समय बुरी तरह से थक चुका था और वो बेड पर पड़ा रहा लेकिन उसका लंड अभी भी खड़ा था.

उधर मीनाक्षी और डिंपल दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से चूम चाट रही थीं.

पांच मिनट बाद आलोक ने आंखें खोलीं और उन दोनों को इस तरह से खेलते देखा तो वो अपनी जगह से उठ कर उन दोनों के पस चला गया.

वो मीनाक्षी की चिकनी जांघ पर अपना हाथ फेरने लगा.

मीनाक्षी जो पहले ही मदहोश थी, अपने पैर पर आलोक का हाथ लगते ही अपने आप पर काबू नहीं रख सकी.
उसने डिंपल को छोड़ दिया और वो आलोक की तरफ़ मुड़ गयी.

उसके सामने आलोक बिल्कुल नंगा अपना खड़ा लंड लिए खड़ा था.

आलोक एक बार फिर से चुत चोदने के मूड में आ गया था.

मीनाक्षी ने आलोक के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और अपना मुँह उसके लंड पर रगड़ने लगी.

आलोक का लंड अब भी सोनम की चूत के खून और रस से भीगा हुआ था.
उसने मीनाक्षी को अपने दोनों हाथों में बांधा और उसे चूमने लगा.

आलोक का हाथ मीनाक्षी की नंगी सेक्सी जवानी पर घूमने लगा था. उसका हाथ मीनाक्षी की चूचियों पर गया और वो उसकी दोनों कड़क चूचियों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा.

मीनाक्षी अपनी चूचियों पर आलोक का हाथ पाते ही और जोश में आ गयी और उसने अपना हाथ आलोक के खड़े लौड़े पर रख दिया.

आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की मुट्ठी में पाते ही उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा.
वो दूसरी चूची को अपने हाथ में लेकर उसका निप्पल मसलने लगा.

कुछ ही देर में मीनाक्षी ने आलोक के लंड को अपने हाथों में पूरा ले लिया और उसके सुपारे को एक बार खोल कर बंद किया.

उसे लंड देख कर गर्मी चढ़ गई और एकाएक मीनाक्षी ने आलोक के लंड के सुपारे को अपने मुँह में भर लिया.
वो लंड चाटने लगी.

जैसे ही मीनाक्षी ने आलोक का लंड अपने मुँह में लिया, वैसे ही आलोक ने अपनी कमर को हिला कर अपना लंड मीनाक्षी के मुँह के अन्दर पेल दिया.

वो बोला- ले ले मेरी रानी … मेरा लंड अपने मुँह में लेकर इसको खूब चूस … इसके बाद मैं इसको तुम्हारी चूत में डाल का इसे चूत चुसाऊंगा.

मीनाक्षी ने अपने मुँह से आलोक का लंड निकाल कर कहा- बस सिर्फ मेरी चूत से ही अपना लंड चुसवाओगे, गांड से नहीं? मैं तो तुम्हारा लंड अपनी चूत और गांड दोनों से खाऊंगी. क्या तुम मुझको अपना लंड दोनों छेदों में खिलाओगे?

आलोक की तो मानो लॉटरी निकल आई थी. वो तो अब तक तीन छेद ही समझ रहा था, जबकि उसे अब छह सील बंद छेदों की जुगाड़ दिखाई देने लगी थी.

थोड़ी देर के बाद आलोक ने मीनाक्षी को पलंग पर ले जाकर चित करके लेटा दिया और उसके पैरों के पास बैठ कर उसकी सलवार को खोलने लगा.
सलवार खोलने में मीनाक्षी ने भी आलोक को मदद की और नाड़ा खुलते ही उसने अपनी गांड उठा कर सलवार को नीचे सरका दी, फिर अपनी टांगों से उसे अलग कर दिया.

सलवार उतरने के बाद आलोक ने मीनाक्षी की पैंटी को भी इसी तरह खींचते हुए उतार दिया.

अब मीनाक्षी की गुलाबी कुंवारी चूत उसकी संगमरमर सी चिकनी जांघों के बीच चमकने लगी.

आलोक मीनाक्षी की गुलाबी चूत को अपनी दम साधे देखने लगा और अपनी जीभ होंठों में फेरने लगा.

मीनाक्षी ने आलोक को वासना भरी नजरों से देखा और अपनी चुत को हल्की सी जुम्बिश दी तो आलोक ने झुक कर मीनाक्षी की चूत पर चुम्मा धर दिया और अपना जीभ निकाल कर उसकी चूत की घुंडी को तीन-चार बार चाट दिया.

इससे मीनाक्षी की मादक आह निकल गई; उसकी चुत को मानो जन्नत का सुख मिल गया था.

अब आलोक ने मीनाक्षी की टांगों को फ़ैलाया और ऊपर उठा कर घुटनों से मोड़ दिया.

मीनाक्षी को इस वक्त लंड का इंतजार था.

आलोक ने भी देर नहीं की … उसने अपना लंड मीनाक्षी के चूत के मुहाने पर रख दिया.

इतना करने के बाद आलोक मीनाक्षी के ऊपर झुक गया और उसकी चूचियों को चूसने लगा, भंभोड़ने लगा.
मीनाक्षी मस्त होने लगी.

नीचे उसकी चुत पर लंड की गर्मी मजा दे रही थी और ऊपर चूचियों को चुसवाने का सुख मिल रहा था.

उसके मुँह से हल्के स्वर में कामुक आहें निकलने लगीं.

थोड़ी देर के बाद आलोक ने अपना लंड मीनाक्षी की चूत की फांकों में टच किया और चुत में लंड रगड़ने लगा.

लंड के स्पर्श से मीनाक्षी चुदास से भर उठी और अपनी कमर उठा उठा कर आलोक का लंड अपने चूत में लेने की कोशिश करने लगी.

जब मीनाक्षी से नहीं रहा गया तो वो बोली- अब क्यों तड़पाते हो, कब से आपका लंड अन्दर लेने की लिए मेरी चूत बेकरार है और आप अपना लंड सिर्फ मेरी चूत के ऊपर ऊपर ही रगड़ रहे हो. अब जल्दी करो और मुझको चोदो, फाड़ दो मेरी कुंवारी चूत को. आज मैं लड़की से औरत बनना चाहती हूँ, अब ज्यादा परेशन मत करो. जल्दी से मुझे चोदो और मेरी चूत की आग को बुझा दो.

मीनाक्षी की इतनी सेक्सी मिन्नत सुनते ही आलोक एक तकिया बेड से उठा कर मीनाक्षी के चूतड़ों के नीचे लगा दिया, जिससे मीनाक्षी की चुत और ऊपर को उठ गई और खुल गयी.
लंड ने भी चुत की फांकों में से काफी रस निकाल दिया था. चुत एकदम रसीली हुई पड़ी थी.

आलोक ने अपने लंड से एक जोरदार धक्का मीनाक्षी की चूत में दे मारा.

चिकनाई के कारण उसका पूरा लंड सरसराता हुआ मीनाक्षी की चूत में जड़ तक घुस गया.
मीनाक्षी के मुँह से चीख निकल गयी और उसकी चूत से खून निकलने लगा.

लेकिन उसे इस बात का पता ही नहीं चला कि खूनाखच्ची हो गई है.
उसे तो भयंकर वाला दर्द हो रहा था इसलिए मीनाक्षी ने आलोक को जोरों से जकड़ लिया और अपनी टांगें आलोक की कमर पर कस दीं.

लंड चुत की जड़ में ठोकने के बाद आलोक ने लंड की पोजीशन को स्थिर कर दिया और वो मीनाक्षी की एक चूची चूसते हुए एक हाथ से दूसरी चूची की घुंडी को मसलने लगा.

धीरे धीरे मीनाक्षी का दर्द कम होने लगा और उसकी गर्मी फिर से बढ़ने लगी.
कोई दो मिनट बाद मीनाक्षी खुद अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी.

आलोक ने भी अब अपनी कमर चलानी चालू कर दी और वो मीनाक्षी की चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा.

मीनाक्षी की चुत मोटे लंड के कारण काफी परपरा रही थी और इसी कारण से वो छटपटा रही थी. मगर उसे अपनी बहनों के जैसे चुत फड़वाने की बेचैनी थी इसलिए वो दांत भींच कर दर्द को सहन करने लगी.

हॉट सिस्टर्ज़ चुदाई की कहानी के अगले हिस्से में मीनाक्षी की आगे की चुदाई लिखूंगा … आप मेरी इस सेक्स कहानी के लिए अपने कमेंट्स करना न भूलें.

प्रेषक : कुमार Antarvasna

मेरी पत्नी रीति जिसकी Antarvasna उम्र अब बयालीस वर्ष है और मैं पैंतालीस का हूँ। करीब चार वर्ष पहले हम लोगों ने एक बड़ा ही नया अनुभव किया। आज अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर इतनी कहानियाँ पढ़ने के बाद सोचा कि मन की बात बता ही दूँ। कुछ विवरण और वार्तालाप थोड़े काल्पनिक हैं, इस कहानी को रोचक बनाने के लिए, लेकिन हुआ सब कुछ वैसा ही जैसा लिखा है।

उस समय रीति 38 वर्ष की थी। हमारा यौन-जीवन काफी आनंदमय था और शादी के इतने सालों बाद बहुत ही खुल गए थे। शादी के चौदह वर्षों के बाद नए तरीकों से सेक्स जिंदगी को आनंदमय बनाने का प्रयास करते, जैसे कि रीति का कभी कभी अंग प्रदर्शन, साथ ब्लू फिल्म देखना, जब घर में अकेले हों तो नंगा रहना और वैसे ही खाना खाना साथ में, देर रात को अँधेरे में बालकॉनी में रीति का लगभग नग्न साथ बैठना इत्यादि।

हम सम्भोग के समय बिल्कुल खुली बातें करते, तीसरे पुरुष और स्त्री के बारे में फंतासी करते, एक दूसरे को प्यार भरी गंदी गालियाँ देते और एक दूसरे के अंगों के लिए गंदी बातें करते। लेकिन कभी भी हमने तीसरे पुरुष या स्त्री के साथ सेक्स करने के लिए प्रयास नहीं किया, हम ऐसे ही बहुत खुश थे। हम कभी कभी रात को खाने के बाद गाड़ी में दूर तक चक्कर लगाते और शहर के बाहर हाईवे पर जाते, शहर का नाम नहीं बताऊँगा।

रीति जो काफी भर-पूरे शरीर की है और स्तन जिसके ज्यादा बड़े तो नहीं लेकिन बहुत ही गुदाज और उन्नत हैं, मेरे कहने पर ब्लाऊज़ से निकाल लेती और उनकी घुंडियों तक उन्हें बाहर कर लेती। हमें एक अजीब प्रकार का आनंद प्राप्त होता यह सोच कर कि नजदीक से गुजरने वालों की नजर उन स्तनों पर पड़ती है और रीति और मैं दोनों सेक्स की गर्मी महसूस करते और घर आकर बहुत ही रोमांचक चुदाई का मजा लेते।

एक दो बार हमने देखा कि बाहर सड़क पर चलने वालो की नजर रीति के अधखुले स्तनों पर पड़ी तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गई। रीति के उरोज तो उन्नत थे ही, सबसे ज्यादा सेक्सी थी उसकी जांघें और मोटे नितम्ब। जांघ जैसे कि मोटी शिला की तरह बिल्कुल चिकनी, गोरी और नितम्ब 39 इंच। उन कूल्हों को देख कर किसी का भी मन ख़राब हो सकता है आज भी।

एक दिन देखा कि एक चने वाला अपना सामान समेट कर जाने ही वाला था, तभी रीति ने कहा- हम चना खायेंगे !

मैंने गाड़ी रोकी और उससे मसाला चना लिया जो काफी स्वादिष्ट था। मैंने पूछा- क्या रोज यहाँ आते हो ?

तो उसने बताया- करीब दो हफ्ते से ठेला यहाँ लगा रहा हूँ, उसके पहले कहीं दूसरी जगह लगाता था।

चने वाला अंदाज़ 35 साल का होगा लेकिन शरीर से हट्टा कट्ठा था और बहुत ही साफ़ सुथरा जैसे कि रोज शरीर पर तेल मालिश करता हो, कुछ-कुछ पहलवानों जैसा सुडौल शरीर।

मैंने नाम पूछा तो बताया- सरजू !

हम चना लेकर चले आये। रात को जब रीति के साथ सम्भोग करते हुए उस चने वाले की याद आई तो मैंने अपनी पत्नी से पूछा- सरजू कैसा लगा?

रीति ने कहा- फालतू की बातें मत करो ! और हंसने लगी।

मैंने कहा- कल जब जायेंगे तो उसे भी अपने उरोजों के दर्शन कराना ! पागल हो जाएगा !

रीति ने कहा- चलती गाड़ी में बात और है, गाड़ी रोक कर मैं अपने चूचों को नहीं दिखाऊंगी, कोई गड़बड़ हो गई तो क्या होगा?

मैंने कहा- क्या उसका शरीर तुम्हें मस्त और मजबूत नहीं लगा?

तो वो मुझे चूमने और काटने लगी। मैं जानता था कि चने वाले की बात याद करके उसे मजा आ रहा था।

हम दो तीन दिन बाद फिर उस तरफ निकलने लगे, रीति से मैंने कहा- तुम्हारी सबसे छोटी और काली वाली जालीदार ब्रा पहनो !

रीति ने पहन तो लिया पर चूचों को दिखाने से मना कर दिया, कहा- गाड़ी रोक कर ऐसा करना खतरनाक होगा !

मैंने कहा- चलो तो !

जाते हुए देखा कि चने वाला ठेला लगाये खड़ा था, लौटते हुए मैंने रीति से कहा कि अपने चूचे बाहर कर ले ! पहले तो तैयार नहीं हुई पर जोर देने पर मान गई, कहा- अगर वहाँ भीड़ होगी तो नहीं खोलूंगी !

रीति अपनी चूचियों को बाहर कर लेती थी लेकिन उन पर साड़ी का पल्लू ढांप कर रखती थी और जब भी मौका दीखता, साड़ी का पल्लू हटा अपने उरोजों का प्रदर्शन करती ! अगर भीड़ बहुत होती तो फिर से ढक लेती।

मैंने दूर से देखा कि ठेले पर कोई नहीं है और सिर्फ चने वाला और उसके साथ एक छोटा लड़का खड़ा है, रोशनी भी वहाँ ज्यादा नहीं थी, रीति ने झिझकते हुए अपने स्तनों को ब्रा से निकाल बाहर किया और साड़ी के पल्लू से ढक लिया।

मैंने गाड़ी रोकी और चने वाले को बुलाया नजदीक और रीति को इशारा किया, रीति ने थोड़ा सा पल्लू हटाया और किनारे से उसके गोरे-गोरे बाएँ तरफ के उरोजों ने हलकी सी झलक दी। शायद चने वाले ने भी देखा।

ऐसा तीन चार बार हमने किया और धीरे धीरे रीति ने अपने उरोजों पर का पल्लू करीब करीब एकदम ही हटाना शुरू कर दिया, अब उसके अधनंगे गोरे और ऊंचे स्तन साफ़ दिखते थे, दिखावा ऐसे करती थी जैसे उसे पता ही नहीं और पल्लू खिसक गया हो।

शायद चने वाला कुछ-कुछ समझ रहा था, अब जब भी गाड़ी वहाँ खड़ी करता, चने वाला दौड़ा आता और चने देने के बहाने वहाँ खड़ा होकर मेरे और रीति से इधर उधर की बातें करने लगता, हम भी थोड़ा निडर हो गए और आनंद लेने लगे।

रीति की झिझक कम हो रही थी, वो पहले से ज्यादा उरोजों का प्रदर्शन चने वाले के लिए करने लगी। अब तो लगभग एक तरफ के चूचे को पूरा ही बाहर निकाल कर उसे दिखाने लगी, चने वाले का ठेला उस तरफ ही होता था जिस ओर रीति बैठती थी यानि कि रीति की बाईं ओर !

चने वाला भी अब समझ गया था।

मैं और मेरी पत्नी चुदाई का बहुत मज़ा ले रहे थे, सरजू का जिक्र होते ही रीति गर्म हो जाती थी और मैंने देखा कि उसकी बूर पानी से भर जाती थी, मुझे दांतों से काटने लगती और सिसकारी भी लेती। हालाकिं किसी दूसरे समय बात करता तो मुझ पर गुस्सा दिखाती।

एक दिन जब गाड़ी रोकी तो देखा कि सरजू चने लेकर आया और उसने मेरी रीति की ओर का दरवाजा खोल कर चने रीति और मेरे हाथ में दिए, पहले वो खिड़की से ही देता था।

मैंने कुछ नहीं कहा, वो रीति से काफी सटकर खड़ा था। अब वो दो-अर्थी भाषा में भी बोलने लगा और रीति को सीधा ही संबोद्धित करता, जैसे एक दिन बोल पड़ा- मेमसाब, मेरा चना आपके लिए स्पेशल तैयार किया है गरमा गरम दिखाऊँ क्या?

इसके आगे की घटना अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़िए शीघ्र ही ! Antarvasna

Hindi Antarvasna stories

Antarvasna, मेरा नाम सुमित है, मैं कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर का काम करता हूँ, मेरा ऑफ़िस है गुजरात में !

मैं और मेरे घर वाले बहुत ही साधारण हैं इसलिए मेरा स्वभाव एक अच्छे लड़के की तरह है, पर क्या पता था कि एक दिन मेरी ज़िंदगी ही बदलने वाली है।

मेरी ज़िंदगी एक भाभी और उसकी सहेली ने बदल दी। उस भाभी का नाम सुषमा है। मैंने कभी उसे नहीं देखा था पर सुषमा भाभी सब कुछ मेरे बारे में जानती थी।

एक दिन शाम को मेरे ऑफ़िस में उसका फोन आया और कहने लगी- यू आर सुमित?

मैंने कहा- यस, हाँ बोलिए क्या काम है?

उसने कहा- मेरे घर का कंप्यूटर खराब हो गया है।

पहले मैंने उनसे पूछा- मेरा नंबर कैसे मिला आपको?

तब उस भाभी ने कहा- कभी कभार मैं तुम्हारे ऑफ़िस के रास्ते से जाती हूँ, तब तुम्हारे ऑफ़िस का नंबर मुझे तुम्हारे ऑफ़िस के बोर्ड पर से मिला और मैंने कॉन्टेक्ट किया तुमसे !

मैंने कहा- अच्छा। कल मैं आ जाता हूँ।

भाभी बोली- नहीं अभी आना होगा !

मैंने कहा- जी अभी नहीं आ सकता, अभी रात के आठ बज रहे हैं तो मैं कल आ जाऊँगा।

तब वो कहने लगी- मुझे आज कंप्यूटर में कुछ ज़रूरी काम है इस लिए तुम्हें अभी ही आना होगा।

मैंने कहा- जी अभी नहीं ! मैं कल सुबह जरूर आ जाऊँगा।

पर वो भाभी नहीं मानी, कहने लगी- मुझे आज कंप्यूटर में कुछ ज़रूरी काम है।

फिर मुझे भी उसकी बात माननी पड़ी और कहा- ओके, अपना एड्रेस बताओ?

उसने अपना पता बताया तो वो मेरी बिल्डिंग के ठीक पास वाली बिल्डिंग थी।

मैं उस पते पर गया, मैने कंप्यूटर को देखा तो उसका पीछे का तार ढील था, मैंने उसे ठीक कर दिया, वो कंप्यूटर चालू हो गया।

तब मैंने कहा- अब मैं चलता हूँ, मुझे घर जाना है, काफ़ी देर हो गई है।

पर भाभी ने मुझे कहा- अब घर नहीं जाओ, यहाँ ही सो जाओ आज, और मैं भी अकेली हूँ आज तो !

मैंने ना कह दिया- नहीं मैं यहाँ नहीं सोऊँगा।

पर उसने मुझसे ज़्यादा रिक्वेस्ट किया और कहने लगी- मेरे पति 15 दिन के लिए आउट ऑफ स्टेट गये हैं, मुझे अकेलापन महसूस हो रहा है और मुझे अकेले सोने में डर भी लगता है।

उसने मुझे अपने घर सुलाने के लिए बहुत मनाया, पर मैंने कहा- नहीं, मेरे घर वाले भी मेरा इंतजार करते होंगे।

भाभी कहने लगी- तुम घर पर फोन कर के कह दो कि आज ऑफीस में काम होने के कारण आज नहीं आ पाऊँगा।

तो मैंने घर पर फोन कर दिया और मैंने भाभी से कहा- मेरे पास तो नाइट ड्रेस भी नहीं है।

और भाभी अपने कमरे में जाकर पज़ामा लेकर आई और कहने लगी- यह पहन लो।

मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर पज़ामा पहन कर बाहर आया। भाभ्हि ने खाना लगा लिया था, हम दोनों ने खाना खाया।

तभी मैंने देखा कि कंप्यूटर चालू है तो भाभी से कहा- कंप्यूटर चालू है, उसे बंद कर दो, इतनी देर से क्यों चालू रखा है।

भाभी कहने लगी- मुझे उस पर अभी काम है।

मैंने कहा- क्या काम है?

उसने कहा- मैं रोज़ रात को ब्लू फिल्म देखती हूँ।

और भाभी मुझसे पूछने लगी- क्या तुम्हें पसंद है ब्लू फिल्म?

मैंने कहा- नहीं, मुझे बिल्कुल नहीं पसंद है ब्लू फिल्म।

मैंने नींद का बहाना कर के कहा- मुझे नींद आने लगी है, मुझे सोना है, तुम बताओ कि कहाँ सोऊँ।

भाभी मुझे सोने का बेड दिखाया और कहा- यहाँ सो जाओ !

मैं बेड पर लेट गया। बाद में ज़रा उठ कर देखा कि आख़िर भाभी क्या कर रही है तो सच में भाभी एक एडल्ट ब्लू सेक्सी फिल्म देख रही थी। मुझे उसमें इंटरेस्ट नहीं था इसलिए मैं वापस बेड पर आकर लेट गया।

थोड़ी देर के बाद मैं देखा कि मेरे पज़ामे पर कुछ है, कोई मेरे लंड को सहला रहा है. मैंने आँखें खोल कर देखा तो भाभी मेरे पास आकर सोई हुई थी और उनका हाथ मेरे लण्ड पर था। मैं घबरा गया, मैं सोने की एक्टिंग करता रहा।

तब थोड़ी देर देखता रहा तो वो और भी जोश में आकर मेरा लंड को ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद वो धीरे धीरे मेरे पज़ामे में हाथ डालने लगी। मैंने उठने की कोशिश की, भाभी को कहने लगा- यह क्या कर रही हो?

भाभी कहने लगी- मुझे बहुत सेक्स चढ़ गया है, मुझे तुमसे चुदवाना है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने कहा- नहीं, मैं यह काम नहीं करूँगा। मैंने किसी को यह न करने का वादा किया है।

उस पर भाभी कहने लगी- ओके, मुझे मत चोदना पर मुझसे खेल तो सकते हो?

तब मैंने कहा- प्लीज़, मुझे यह सब भी पसंद नहीं है।

तब भाभी ने थोड़ा गुस्सा करके कहा- अगर तुमने यह मुझसे नहीं किया तो मैं पूरे बिल्डिंग वालों को जगा दूँगी कि तुम मेरे घर जबरदस्ती आए हो और मुझे परेशान कर रहे हो।

तब मैं और घबरा गया पर भाभी सेक्सी फिल्म देख कर बहुत ही गर्म हो गई थी, इसलिए वो नहीं मान रही थी।

मैंने भाभी को कहा- अगर तुमने मुझे अब छुआ तो मैं यहाँ से चला जाऊँगा।

भाभी भी कहने लगी- ओके !

तब मैंने कहा- ओके, तुम मेरे साथ खेल सकती हो पर मैं तुम्हें नहीं चोद सकता।

उसने कहा- ठीक है।

भाभी ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और मेरा टी-शर्ट उतार दिया, वो मुझसे कहने लगी- अब मेरे ये बूब्स के निप्पल को थोड़ा अपने हाथ की उंगली से मसल दो !

और मैं मसलने लगा।

फ़िर उसने कहा- अपना मुँह ज़रा मेरे मुँह के पास लाओ।

जब मैं मेरा मुँह उसके करीब ले गया तो उसने अपने हाथ से मेरा सर पकड़ कर मुझे किस करने लगी, वो ज़ोर ज़ोर से स्मूच करने लगी।

मैंने कहा- अब बस करो, मेरा दम घुट रहा है।

तब भी जोश में आकर उसने करीबन दस मिनट तक स्मूच किया।

तब भाभी ने मेरा हाथ लेकर अपने वक्ष पर रख दिया और कहने लगी- अब अपने हाथ से मेरे बूब्स और उसके निप्पल को दबाओ।

फिर उसने अपना हाथ मेरे पज़ामे में धीरे धीरे हाथ डाल दिया और मेरे लंड को हिलाने लगी, कहने लगी- यह तुम्हारा लंड कितना छोटा है।

पर मैंने सच में यह सब कभी नहीं किया था, इसलिए मैं घबरा रहा था, मेरा लंड खड़ा नहीं हो रहा था।

पर भाभी ने कहा- अच्छा, इसे मैं अभी ठीक कर देती हूँ।

उसने मेरा पजामा उतारा और ज़ोर ज़ोर से मेरे लण्ड को मसलने लगी। फिर भाभी मुझसे कहने लगी- तुम अब मेरी चूचियाँ मुँह में लो और एक हाथ से मेरी चूत के ऊपर उंगली फिराओ।

और थोड़ी उंगली फिराने के बाद वो और भी गर्म हो गई, मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और कहने लगी- थोड़ा तो करो अभी !

मैंने कहा- नहीं, मैंने किसी को वादा किया है ! मैं नहीं करूँगा।

फिर वो अचानक मेरे मुख पर अपनी चूत रगड़ने लगी और कहा- अब मैं अपनी हवस ऐसे ही पूरी करूँगी।

बस फिर वो ज़ोर ज़ोर से मेरे मुँह से चूत को रगड़ रही थी, मैंने कहा- इसमें से तो पानी आ रहा है।

भाभी ने कहा- यह मेरी चूत का पानी है।

मेरा पूरा चेहरा उसकी चूत के पानी से भर गया था, फिर भाभी मेरे लंड को चूसने लगी और कह रही थी- तुम मेरी चूत को ज़ोर ज़ोर से चूसो, नहीं तो मैं तुम्हारे लंड को खा जाऊँगी।

मैं मजबूर होकर थोड़ा थोड़ा चूसता रहा और भाभी मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से मुँह में हिला रही थी। और क्या पता मेरे लंड में एक गर्मी महसूस हुई और मेरे लंड से गर्म पानी निकला और सुषमा भाभी हँसने लगी, कहने लगी- तुम्हारा इतना ज्यादा गाढ़ा पानी निकला।

फिर मैंने कहा- अब मुझे नींद आ रही है, मैं सो रहा हूँ।

पर भाभी मेरे ऊपर पूरे रात तक पड़ी रही और मुझे चूमती रही।

सुबह किसी तरह मैं उनसे पीछा छुड़ा क अपने घर आया।

Antarvasna कहानी जारी रहेगी !

Hindi Sex Stories

दोस्तो, यह मेरी प्रथम Hindi Sex Stories आपबीती और अनुभव है क्योंकि इससे पहले मुझे सेक्स का कोई न तो अनुभव था न कोई किताब या कहानी पढ़ी थी। बस दो या तीन कहानियाँ अपने दोस्त राम के साथ छुप कर ज़रूर पढ़ी थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था कि कोई इच्छा हो या मन करता हो कुछ करने का, क्योंकि मैं कुछ जानता ही नहीं था।

एक बार टेस्ट के दिनों में जब मैं पढ़ाई कर रहा था तो जीव-विज्ञान के टेस्ट कठिन होने के कारण राम और मैंने साथ-साथ रात में पढ़ने का सोचा और मैंने राम से कहा कि वो मेरे घर पर रात को आठ बजे तक आ जाये, खाना खाकर फिर रात भर पढ़ाई करते रहेंगे और पाठ भी आसानी से एक दूसरे को समझा लेंगे।

मेरे घर पर मेरा कमरा घर से बाहर एक ओर था और वहाँ न तो घर वाले आते थे और न ही कोई आवाज़ आती थी। वह तैयार हो गया और रात आठ बजे मेरे कमरे पर आ गया। मैं पहले ही खाना खा कर बनियान-पजामा पहन कर पढ़ रहा था। मैंने देखा कि वो भी पजामा और कुर्ता पहने था। उसने आते ही अपना कुर्ता उतार कर खूँटी पर टांग दिया और बनियान-पजामे में मेरे सामने मेज़ की दूसरी ओर कुर्सी पर बैठ गया और हम दोनों एक साथ एक एक पाठ दोहराने लगे।

रात करीब एक बजे जब स्त्री पुरुष के जनन-अंगों वाला पाठ आया और उसमें जनन अंगों की फोटो वाला पेज आया तो कुछ रात की खुमारी और कुछ सेक्स अंगों की फोटो देख कर हम दोनों उत्तेजित होने लगे, हालांकि हम दोनों ही उस पाठ को पहले भी कई बार पढ़ चुके थे।

अचानक राम बोला कि उसे सू-सू आ रही है और वह उठने लगा तो मेरी नज़र अचानक उसके पजामे की तरफ गई तो देखा कि उसका लंड पूरा तना हुआ पजामे को तम्बू की तरह ताने हुए था। मुझे यह देख कर हंसी आ गई और वो शरमा कर बोला- धत, क्या देख रहा है? क्या तेरा भी ऐसे ही हो रहा है?

तो मैं भी उठा तो देखा कि मेरा भी वही हाल था और मैं भी शरमा गया। फिर वह पेशाब करने चला गया और उसके आने के बाद मैं भी पेशाब करने चला गया। फिर वापस आने पर दोनों उसी चैप्टर को याद करने लगे लेकिन अब हम दोनों का ही मन नहीं लग रहा था और दोनों ही का दिमाग कहीं और भटक रहा था।

दस मिनट के बाद राम बोला- अब पढ़ने में मन नहीं लग रहा है क्योंकि मेरा लंड फिर से कड़ा होने लगा है, लगता है यह पाठ पूरा नहीं कर पाऊँगा। यार तू बता मैं क्या करूँ?
मैंने कहा- यार मेरा भी यही हाल है!
और कुर्सी से उठ कर उसे दिखाया।

राम ने कुछ सोचा और उठ कर बोला- यार चल एक दूसरे को नंगा करके लंड मिलाते हैं किसका कैसा है!

यह कहते हुए उसने अपना कुरता और पजामा दोनों उतार कर कच्छा भी उतार दिया और ऊपर से नीचे तक पूरा नंगा हो गया। उसका लंड काले रंग का सीधा ऊपर को तना था और करीब 7 इंच लम्बा और थोड़ा मोटा आगे से नुकीला लेकिन खाल से ढका हुआ था।

यह देख कर मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड भी लगभग उसी के बराबर लेकिन गोरा था क्योंकि मेरे शरीर का रंग गोरा और उसका सावला था। मेरा लंड भी खड़ा था। यह देख कर हम दोनों पता नहीं कैसे अपने आप एक दूसरे से चिपक गए जिससे दोनों के लंड आपस में टकराने लगे और हम दोनों को जाने कैसी मजेदार अनुभूति होने लगी।

दो मिनट के बाद हम दोनों एक दूसरे का लंड हाथों में पकड़ कर सहलाने लगे जिससे लंड के आगे की चमड़ी अपने आप पीछे हो गई और लंड खुल गए। हम लोगों को बहुत मजा आ रहा था। दोनों ने दो-तीन कहानियाँ मस्तराम की पढ़ी थी, अतः ऐसा करते हुए हम दोनों बिस्तर पर पहले बैठ गए फिर अपने आप ही लेट गए अगल बगल और जोरों से एक दूसरे को चाटने लगे और लंड से लंड को धक्के देकर टकराने लगे।

बड़ा ही मजा आ रहा था। हम लोगों को न तो गांड मारना और न ही गांड मरवाना आता था लेकिन इसी प्रकार मजा लेते हुए राम बोला- यार मस्तराम की कहानी में जो पढ़ा है उसे करके देखते हैं।

मैं बोला- ठीक है!
और यह सुनकर राम ने पूछा- क्या तेल है?
क्योंकि कहानी में तेल चुपड़ कर ही लंड को गांड के छेद में घुसेड़ते हैं।

मेरे पास तेल नहीं था लेकिन चेहरे पर क्रीम लगाने का शौक होने के कारण क्रीम की शीशी थी। वो मैंने अलमारी में से निकाल कर उसको दे दी।
राम ने कहा- यार किसी से कहना नहीं! नहीं तो बहुत हँसी भी बनेगी और लोग चिड़ाएंगे भी!
तो मैंने कहा- हम दोनों में कोई नहीं बताएगा! बस अब देर मत करो और मस्तराम की कहानी का प्रैक्टिकल शुरू करते हैं। अब यह बता पहले तू कोशिश करेगा या मैं करूँ?
तो राम ने कहा- यार तू ही कर!

मैंने उसे बिस्तर पर पेट के बल लिटाया और उसकी जांघों के बीच उसके पैर फैला कर इस तरह बैठ गया कि मेरे लंड के सुपाड़े और उसकी गांड के छेद दोनों लगभग एक सीध में आ गये। फिर मैंने शीशी में से क्रीम निकाल कर उंगली से अपने लंड के सुपाड़े और पीछे भी लगाई और थोड़ी क्रीम उंगली से उसकी गांड के छेद के ऊपर लगा दी। फिर थोड़ा आगे बढ़ कर अपना सुपाड़ा उसकी गांड के छेद पर रख कर जोर लगाया कि लंड अंदर घुसे। लेकिन वो तो जरा भी अंदर नहीं गया तो राम बोला- चूतिया! खूब जोर से धक्का पेल! तभी तो अंदर जायेगा! मैं अपने हाथों से दोनों चूतड़ पकड़ कर फैला रहा हूँ, तू जोर से ताकत लगा कर घुसेड़ दे!

मैंने आव देखा न ताव! और पूरी ताकत से धक्का मारा तो एक चीख तो राम के मुँह से निकली- हाई दय्या रे मर गया! निकाल जल्दी से निकाल! साले मैं मर जाऊँगा!

और वह मेरा लंड अपनी गांड में से बाहर निकलने को छटपटाने लगा। मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गांड में घुस चुका था। दूसरी चीख हलकी सी मेरे मुँह से निकली क्योंकि पहली बार मेरे लंड से खाल पूरी तरह हट कर बिल्कुल पीछे हो गई थी और लंड राम की गांड की दोनों फांकों के बीच बहुत टाइट फंसा था।राम के छटपटाने से मेरा संतुलन भी बिगड़ गया था जिससे मैं उसकी पीठ पर गिर गया था और राम मेरे वजन के कारण हिल भी नहीं पा रहा था। मैं थोड़ी देर उसी प्रकार लेटा रहा और सोच रहा था कि क्या करूँ, अपना लंड बाहर निकालूँ या दूसरा धक्का मारकर पूरा अंदर कर दूँ!

इस प्रकार चार-पाँच मिनट बीत गए तो राम का छटपटाना बंद हो गया और वो शांति से लेटा था। फिर राम खुद बोला- यार जब प्रैक्टिकल करना है तो पूरा ही कर लेते हैं! जो होगा देखा जायेगा! तू लंड पूरा घुसेड़ दे लेकिन अबकी बार एक धक्के में पूरा घुस जाये क्योंकि तीसरा धक्का खाने की ताकत नहीं है मेरे में!

मैंने शरीर की पूरी ताकत अपने कूल्हों में इकठ्ठा करके जो धक्का मारा तो एक ओर तो मेरा पूरा लंड उसकी गांड में जड़ तक बैठ गया और दूसरी ओर राम तो चीख कर रोने लगा- यार, मैं तो मर गया! मेरी गांड भी फट गई होगी। अब मैं कल कैसे स्कूल जाऊँगा?

उधर मेरे लंड में भी बहुत दर्द हो रहा था लेकिन अब तो जो होना था वो हो चुका था और मैं उसके ऊपर लेटा था चुपचाप!

थोड़ी देर बाद जब दोनों को शांति हुई तो मैं कहानी में पढ़े अनुसार धीरे धीरे धक्के लगाने लगा तो हम दोनों को तीन चार मिनट के बाद मजा आने लगा। मेरे धक्कों की स्पीड धीरे धीरे अपने आप बढ़ती चली गई और राम भी नीचे से अपने चूतडों को ऊपर उठा उठा कर मेरे धक्कों को बढ़ाने लगा और उसके मुँह से अपने आप निकलने लगा- यार मेरी जान चोद दे, फाड़ दे मेरी गांड! बड़ा मजा आ रहा है! आज तक इतना मजा कभी नहीं आया!

और मैं भी पूरी स्पीड से धक्के लगाता हुआ बोल रहा था- ले मेरी जान, पूरा लंड पी लिया अब और लम्बा कैसे करूँ?

इस प्रकार बातें करते स्पीड बढ़ती गई और अचानक मेरे लंड से गरम गरम लावा सा निकलने लगा और मुझे लगा कि मैं किसी तरह राम की गांड में खुद घुस जाऊँ।

फिर मैं पस्त हो कर राम की पीठ पर लेट गया और राम भी पस्त हो गया था। मेरा लंड भी अपने आप सिकुड़ कर छोटा होकर राम की गांड से फिसल कर बाहर आ गया और उसकी गांड के बाहर गीला गीला सा मेरे लंड से टपकने लगा था।

थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से उठा तो देखा कि उसकी गांड में से सफ़ेद और लाल तरल निकल रहा था। मैंने कहानी के हिसाब से समझ लिया कि लाल तो गांड के फटने से निकला खून और सफ़ेद मेरे लंड से निकला वीर्य है जिससे राम की गांड लबालब भरी हुई थी, क्योंकि मैं जीवन में पहली बार झड़ा था इसलिए वीर्य बहुत ज्यादा मात्रा में निकला था। लेकिन आनन्द जो आज पहली बार गांड मारने में आया उसे मैं कभी भूल नहीं सकता था और सोच लिया कि अब रोज़ राम की या जो मिल जाये उसकी मारूंगा ज़रूर!

मैंने झाड़-पौंछ करने वाला कपड़ा लिया और राम की गांड को धीरे धीरे साफ किया। अब राम धीरे से उठा तो उसे दर्द हो रहा था, लेकिन वो बहुत खुश था कि गांड मरवाने में इतना मजा आता है तो अब अलग अलग आकार के लंड खोज खोज कर गांड मरवाऊँगा।

दोस्तो, उसके बाद थोड़ी देर हम लोग सेक्स की ही बात करते रहे और मैं राम का लंड सहलाता रहा जिससे वो पूरी तरह से खड़ा हो गया तो मैंने खुद राम से कहा- यार, गांड मारने में बहुत मजा आया और मैं अब रोज़ नई नई गांड मारूँगा! अब तुम मेरी गांड मारो जिससे मुझे उसका भी स्वाद मिल जाये।

यह कह कर मैं पेट के बल बिस्तर पर लेट गया और… दोस्तो बार बार वैसी ही कहानी दोहराने से क्या फायदा!

जिस तरह मैंने उसकी गांड मारी और फाड़ी और जितना दर्द मुझे अपने लंड में अनुभव हुआ उतना ही राम को भी हुआ और मेरी भी गांड फट गई और बहुत दर्द हुआ।

लेकिन दोस्तो, बहुत मजा आया और सोच लिया कि गांड मारना और मरवाना दोनों में बहुत मजा आता है और यदि लंड और गांड बदलती रहे तो कहना ही क्या!

पहले तो हम लोग आपस में ही यह खेल खेलते रहे लेकिन फिर हम लोगों ने अपना दायरा बढ़ाया और बहुत से लोगों को शामिल करके तब तक मजा लेते रहे जब तक पढ़ाई पूरी करके अपने अपने व्यापार में लग गए और शादी न हो गई।

बल्कि शादी के बाद भी जब मौका मिलता अपने दायरे के लोग आपस में मारने-मराने का गेम खेलते रहते थे जो आज भी जारी है।

दोस्तो, बहुत से किस्से हैं! आगे भी लिखता रहूँगा। Hindi Sex Stories

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